13 अगस्त 1997 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि महिलाओं का यौन उत्पीड़न सुरक्षित वातावरण में काम करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। हैदराबाद स्थित ARCI की आंतरिक शिकायत समिति (AICC) महिलाओं को अवांछित यौन प्रकृति के व्यवहार के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने के लिए उपयुक्त तंत्र उपलब्ध कराती है।
यौन उत्पीड़न की परिभाषा
सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, यौन उत्पीड़न में निम्नलिखित में से कोई एक या अधिक कृत्य अथवा व्यवहार शामिल हो सकते हैं, चाहे वे प्रत्यक्ष रूप से किए गए हों या संकेतों के माध्यम से:
- शारीरिक संपर्क और अनुचित शारीरिक निकटता
- यौन अनुग्रह की मांग या अनुरोध
- यौन प्रकृति की टिप्पणियाँ
- अश्लील सामग्री दिखाना
- उपरोक्त में से किसी भी कृत्य को करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों (फोन, इंटरनेट, इंट्रानेट) का उपयोग
- यौन प्रकृति का कोई अन्य अवांछित शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिक व्यवहार
यौन उत्पीड़न मानी जाने वाली परिस्थितियाँ
- रोजगार में अनुचित लाभ देने का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वादा
- रोजगार में प्रतिकूल व्यवहार करने की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष धमकी
- वर्तमान या भविष्य की रोजगार स्थिति के संबंध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष धमकी
- कार्य में बाधा डालना या भयभीत करने वाला, अपमानजनक अथवा शत्रुतापूर्ण कार्य वातावरण बनाना
- ऐसा अपमानजनक व्यवहार जो महिला के स्वास्थ्य या सुरक्षा को प्रभावित कर सकता हो
यौन उत्पीड़न होने पर आपको क्या करना चाहिए?
- शर्मिंदा न हों। उत्पीड़न करने वाले व्यक्ति को स्पष्ट रूप से बताएं कि उसका व्यवहार आपको आपत्तिजनक लगता है।
- यह सोचकर उत्पीड़न को अनदेखा न करें कि यह अपने आप रुक जाएगा। आगे आएँ और AICC में शिकायत दर्ज करें।
- उत्पीड़न के बारे में किसी विश्वसनीय व्यक्ति से बात करें, अधिमानतः AICC से। इससे आपको साहस मिलेगा और समान परिस्थितियों का सामना कर रहे अन्य लोगों को भी सहायता मिल सकती है।
- यौन उत्पीड़न की सभी घटनाओं का रिकॉर्ड रखें। बाद में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने पर यह उपयोगी होगा।
- सबसे महत्वपूर्ण बात, उत्पीड़न के लिए पीड़िता को कभी भी स्वयं को दोषी नहीं मानना चाहिए।
दोषी के विरुद्ध कार्रवाई
CCS (आचरण) नियम, 1964 के अनुसार AICC को जाँच प्राधिकारी माना जाता है। यदि संबंधित आचरण भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत किसी विशिष्ट अपराध की श्रेणी में आता है, तो उपयुक्त प्राधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज की जाएगी। यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरती जाती है कि शिकायतकर्ता और गवाहों को प्रताड़ित न किया जाए। शिकायतकर्ता को आरोपी का या स्वयं का स्थानांतरण कराने का विकल्प उपलब्ध है।
समिति की भूमिका
- यौन उत्पीड़न की शिकायत पर जाँच प्राधिकारी के रूप में कार्य करना।
- यह सुनिश्चित करना कि शिकायत के कारण शिकायतकर्ता और गवाहों को प्रताड़ित न किया जाए या उनके साथ भेदभाव न हो।
- ARCI में कार्यरत सभी व्यक्तियों को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण से संबंधित नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए सक्रिय कदम उठाना।
कानूनी ढाँचा
22 अप्रैल 2013
कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई और इसे अधिनियमित किया गया।
09 दिसंबर 2013
केंद्र सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 की धारा 29 के अंतर्गत नियम अधिसूचित किए।
27 नवंबर 2014
कार्मिक मंत्रालय द्वारा सेवा नियमों को कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के अनुरूप बनाने के संबंध में कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया।
संपर्क
शिकायत दर्ज कराने या AICC के साथ आवश्यक पत्राचार को आसान और पूर्णतः गोपनीय बनाए रखने के लिए एक समर्पित आधिकारिक ईमेल पता उपलब्ध है। इस ईमेल तक पहुँच केवल समिति के सदस्यों तक सीमित है।
कृपया ईमेल आईडी नोट करें: aicc@arci.res.in
```