
जहाँ तक सतह संशोधन प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र का संबंध है, भारत ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय परिपक्वता और प्रगति हासिल की है। भारतीय उद्योगों द्वारा सतह संशोधन प्रौद्योगिकियों को अपनाने में स्पष्ट रूप से बढ़ती प्रवृत्ति को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा की गई कई पहलों से भी प्रोत्साहन मिला है। ARCI के वैज्ञानिकों ने इन पहलों को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई है और संगठन ने लगातार राष्ट्रीय महत्व की कोटिंग प्रौद्योगिकियों की पहचान करने तथा उन प्रौद्योगिकियों को प्राथमिकता से विकसित करने का प्रयास किया है, जो देश में अन्यत्र उपलब्ध नहीं हैं।
वर्षों के दौरान, ARCI ने सतह संशोधन के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान के रूप में अपनी पहचान सफलतापूर्वक स्थापित की है। ARCI का अभियांत्रिक कोटिंग्स केंद्र (CEC) उपयुक्त सतह संशोधन प्रौद्योगिकियों की व्यापक श्रृंखला विकसित करने में लगा हुआ है, ताकि प्रतिकूल वातावरण में कार्य करने वाले घटकों की टिकाऊपन और कार्यक्षमता बढ़ाने की चुनौती का सामना करने में भारतीय उद्योगों की सहायता की जा सके। CEC के प्रयासों का मुख्य उद्देश्य प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों को लागत-प्रभावी तरीके से निजी उद्यमियों तक हस्तांतरित करना है।
संभावित उपयोगकर्ता उद्योगों को गुणवत्ता और लागत के विभिन्न विकल्प उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अभियांत्रिक कोटिंग्स केंद्र में कई कोटिंग प्रौद्योगिकियों पर एक साथ काम किया जा रहा है। इनमें से कुछ प्रौद्योगिकियाँ विकसित हो चुकी हैं और सफलतापूर्वक उद्योगों को हस्तांतरित भी की जा चुकी हैं, जबकि अन्य आशाजनक प्रौद्योगिकियाँ अभी विकासाधीन हैं।
CEC में स्थापित कुछ प्रमुख कोटिंग प्रौद्योगिकियाँ:
- डेटोनेशन स्प्रे कोटिंग
- कोल्ड स्प्रे कोटिंग
- अक्षीय प्लाज़्मा स्प्रे कोटिंग
- सक्रियित दहन उच्च-वेग वायु-ईंधन स्प्रे कोटिंग
- सॉल्यूशन प्रीकर्सर प्लाज़्मा स्प्रे कोटिंग
- इलेक्ट्रॉन बीम भौतिक वाष्प निक्षेपण
- कैथोडिक आर्क भौतिक वाष्प निक्षेपण
- मैग्नेट्रॉन स्पटरिंग – DC, पल्स्ड और उच्च-शक्ति इम्पल्स
- माइक्रो-आर्क ऑक्सीकरण
- पल्स्ड इलेक्ट्रोडिपोज़िशन
- स्लरी कोटिंग सुविधा
- धातु-सिरेमिक जोड़ के लिए उच्च-तापमान अनुकूल सीलेंट
- फ्यूज़्ड स्लरी सिलिसाइड और उच्च-एंट्रॉपी मिश्रधातु (HEA) कोटिंग्स
- पैक और स्लरी एल्युमिनाइजिंग का विकास